NARAYAN KAIRO नारायण कैरो

"जिसने देना सीख लिया,उसने जीना सीख लिया!"

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आजादी के नामपर गुलामी की जंजिरेँ!

Posted On: 11 Aug, 2012 Others में

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66 वेँ स्वतंत्रता दिवस के मदहोशी मेँ झूमता अपना भारत आजादी के नाम पर गुलामी के जंजीरोँ मेँ जकड़ा है। यही सच है। सबके सामने कुछ समीचीन प्रशन ये है कि, क्या भारत सुरक्षित है? क्या भारत मेँ समानता है अथवा आर्थिक समानता है? ऐसे कई यक्ष सवाल है जो देश के लोगोँ को सोचने पर मजबूर किया है कि, भारत 1947 से पहले गुलाम था या अब है? निश्चित तौर पर भारत की पूर्णपरिस्थिति असामान्य है। देश की व्यवस्था ही देश को कमजोर बना रही है। तमाम जड़ की बुराई भारत की राजनीतिक कार्यशैली है जो देश की संस्कृति पर आघात किये जा रही है। आज देश भले आजादी का वर्षगाँठ मना रहा पर यथार्थ मे भारत की अधिकांश जनता के पेट मेँ दो वक्त की रोटी सही से नही पहुँचता। घरेलू हालात इतना बुरा हो चुका है कि मुझे आशंका है आगामी दो दशक भारत के आँतरिक भौगोलिक हालत पर गंभीर संकट उभरेँगे। निष्कर्षतः भारत के लिए आजादी महज एक सब्जबाग बनकर रह गया है।
नारायण कैरो,लोहरदगा
11 अगस्त 2012



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dineshaastik के द्वारा
12/08/2012

नारायण जी, सादर नमस्कार। मेरा मानना है कि हम कभी आजाद नहीं हुये थे। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों एवं काँग्रेस के मध्य सत्ता हस्तान्तरण का समझौता हुआ था, वह भी अंग्रेजों की शर्तों पर। यदि मान भी लिया जाय कि हम आजाद भी हुये थे, तो वह आजादी संसद में कैद है। http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/08/07/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8B-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0/


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