NARAYAN KAIRO नारायण कैरो

"जिसने देना सीख लिया,उसने जीना सीख लिया!"

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भारत मेँ परिवर्तन के पदचाप!

Posted On: 3 Aug, 2012 Others में

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भारत के देवभूमि पर परिवर्तन के पदचाप की स्वर साफ सुनाई पड़ने लगी है। लँका पति काँग्रेस को नैतिक अनशन का असर होता ना देख टीम अन्ना का सोलह माह पुरान आन्दोलन आखिर परिस्थिगत काल और समय के बेरुखी से एक राजनीतिक पार्टी का आकार मेँ जनआन्दोलन का अँत होना देखना दुःखद है। दूसरी 9 अगस्त को एक भगवाधारी भारत की रक्षा मेँ परिवर्तन की शँखनाद करने वाले हैँ। बाबा रामदेव का आन्दोलन आजादी के बाद का महा जनशैलाब का दिल्ली मेँ जमवाड़े का गँवाह बनने जा रहा है। परिस्थितियाँ एक साथ कई परिवर्तन को रेखाँकित कर रही हैँ राष्ट्र जीवन मेँ नये उभारोँ के उदय होने का आभास करा रहा है ये समय।
नारायण कैरो, लोहरदगा



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra के द्वारा
03/08/2012

दोस्तों जिस तरह अन्ना का पन्ना बंद हुआ हमें उससे शिक्षा लेनी चाहिए: १.जो मीडिया की वजह से जीते हैं वो मीडिया की वजह से मर जाते हैं. २.हमेशा स्वहित से ऊपर देशहित को रखना चाहिए . ३.हिंदी,हिन्दू और हिंदुस्तान का कोई विकल्प नहीं . ४.दुसरे के(राजीव दिक्सित और बाबा रामदेव के जन जागरण) किये कार्य का श्रेय नहीं लेना चाहिए . ५.लोगों के बिच भ्रम(लोकपाल पर दो बार झूठी जीत और लोकपाल को हर मर्ज की दवा बताना) फैलाकर हासिल की गयी लोकप्रियता टिकाऊ नहीं होती. ६.अच्छे लोगों(बाबा रामदेव और मोदी) को बुरा बता कर लोकप्रियता हासिल नहीं की जाती. ७.स्वदेशी के बिना स्वराज अधुरा होता है इसलिए निबुज्ज पी कर अनसन न तोड़े . ८.बिना पूरी तैयारी और जानकारी के कोई काम न करें. अब सब मैं ही बोलूँगा आप कुछ नहीं बोलोगे ..?

    bharodiya के द्वारा
    04/08/2012

    विडंबना ये है की अच्छे लोग खेमे में बंट जाते हैं । ( १ ) मोदी, (२)रामदेव (३) अन्ना (४) भ्रष्ट्खेमा १ और २ नंबर सत्तामें आता है तो लोकपाल की आशा नही रखनी चाहिए । लेकिन देश जरूर उंचाईया छु लेगा । नंबर ३ अगर प्रचंड बहुमत से आ जाता है तो मूलभूत सफाई कर देगा । लोकपाल लाएगा, चुनाव सुधार भी हो जाएगा । प्रशासन का अनुभव नही होने के कारण थोडी तकलिफ रहेगी । भ्रष्टखेमा शायद सरकार गिरा दे,धन की लालच दे कर । अच्छा आदमी तलवार होता है । दो तलवारें एक म्यान में नही रह सकती । अभिमान के कारण उस की अच्छाई खतम हो जाती है ईस का भान नही रहता । जब की सारे बूरे आदमी सोनिया के एक ही म्यानमें कैद हो गये हैं ।

    dineshaastik के द्वारा
    04/08/2012

    सुरेन्दर जी आपकी प्रतिक्रिया केवल भ्रम उत्पन्न करती है एवं भ्रष्टाचारियों को बल उत्पन्न करती है। रामदेव जी एवं अन्ना टीम दोंनो के उद्देश्य एक है, महात्वाकाँक्षा भी एक है सत्ता प्राप्त करना। किन्तु मुद्दे अलग अलग हैं। रामदेव जी चाहते हैं कि देश का कालाधन वापस आये और अन्ना टीम चाहती है कि देश से भ्रष्टाचार मिटे। यदि दोंनो एक साथ नहीं होते हैं तो फिर जनता को फैसला करना है कि  वह किससे परेशान से कालेधन से या भ्रष्टाचार से। भ्रष्टाचार समर्थक चाहते हैं कि यह एक साथ न आयें। इसके लिये दोंनो के साथ सरकार ने कुछ ऐसी एजेन्सियाँ लगा रखीं हैं जो इन दोंनो को एक नहीं होने देंगी। 


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